साहित्य व विचार पर केंद्रित मासिक पत्रिका'छत्तीसगढ़-मित्र' एवं हिंदुस्तानी भाषाओं के संरक्षण व संवर्धन को समर्पित स्वयंसेवी संस्था'हिंदुस्तानी भाषा अकादमी' के संयुक्त प्रयास से,दिल्ली के हिंदी भवन में,कल दिनाँक 19-06-2022 को,एक कार्यक्रम किया गया।यह कार्यक्रम-'छत्तीसगढ़ मित्र' के संस्थापक संपादक पंडित माधव राव स्प्रे की 150वीं जयंती के समापन पर किया गया।
इस अवसर पर,साहित्य की व्यंग्य विधा को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका'व्यंग्य यात्रा ' को'पंडित माधवराज स्प्रे छत्तीसगढ़ मित्र साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान'से नवाजा गया। 'व्यंग्य यात्रा'की ओर से,यह सम्मान स्वीकार करते हुए पत्रिका के संपादक-प्रेम-जनमेजय ने कहा कि-यह इस पत्रिका के सहयात्रियों और शुभचिंतकों की शुभकामनाओं का फल है। इस समारोह में-ममता कालिया, प्रदीप ठाकुर त्रिलोक दीप ,सुशील त्रिवेदी, अशोक माहेश्वरी, अभिषेक अवस्थी गिरीश पंकज, सुधीर शर्मा, सुधाकर पाठक, तृषा शर्मा जैसे वरिष्ठ साहित्यकार, कवि,लेखक, पत्रकार,भाषाविद व साहित्य प्रेमी मौजूद थे।
प्रेम जनमेजय ने,उपस्थित सभी साहित्यिक मित्रों का आभार प्रकट करते हुए,यह भी कहा कि यह सम्मान उनका नहीं, व्यंग्य यात्रा के सभी शुभचिंतकों का है। यह सम्मान एक भिक्षुक का सम्मान है।इस अवसर पर,'हिंदी भाषा पर केंदित,उनकी पुस्तक 'हिंदी का राष्ट्र और राष्ट्र की हिंदी' का भी लोकार्पण किया गया।
इतिहास, संस्कृति, भाषा, साहित्य, शिक्षा और समाज के संदर्भ में 'भारतीयता और विश्वबोध' को लेकर,एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन इस अवसर पर किया गया था,जिसमें,अनेक विद्वानों ने अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित-वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि-भारतीय संस्कृति,भाषा, राष्ट्रीय चेतना को जगाने में,जिन महान विभूतियों का सबसे ज्यादा योगदान रहा उनमें, महात्मा गांधी, महावीर प्रसार द्विवेदी और पंडित माधवराव राव स्प्रे का नाम मुख्य रूप से लिया जा सकता है। माधवराव जी ने वर्ष-1900 में'छत्तीसगढ़ मित्र' की शुरुआत की,जब न तो देश स्वतंत्र था और न ही प्रकाशन की आज जैसी सुविधाएं थीं।पत्रिका के संपादक होने के नाते,उसके लिए सामग्री जुटाना, कितना कठिन रहा होगा।
वरिष्ठ पत्रकार सुदीप ठाकुर ने कहा कि स्प्रे जी का जीवन केवल 55 वर्ष का था,लेकिन अपने इस छोटे से जीवनकाल में भी पत्रकारिता व भाषा के क्षेत्र में उन्होंने अतुलनीय योगदान दिया।डॉ मैनेजर पांडेय ने उनके उनके लेखन पर अद्भुत कार्य किया है।
डॉ सुशील त्रिवेदी का कहना था कि पंडित माधवराव स्प्रे जी ने धर्म,अध्यात्म और विचारधारा से आगे जाकर,भारत को विश्वबोध करवाया। गिरीश पंकज ने कहा की भारतीयता में,वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पहले से ही समाहित है।आज कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग,भारतीयता की इस भावना को आहत कर रहे हैं।इनसे हमें सावधान रहने की आवश्यकता है।
'हिंदुस्तानी भाषा अकादमी' के अध्यक्ष सुधाकर पांडेय ने कहा कि कोई भी भाषा केवल विचारों का आदान प्रदान करने का माध्यम मात्र नहीं होती,वह उस समुदाय की सभ्यता व संस्कृति की भी वाहक होती है।आज भारतीय भाषायें लुप्त होती जा रहीं हैं।यदि हमारी भाषायें बचेंगी, तो हमारी संस्कृति भी बचेगी।आज भारतीयता को यदि बचाना है,तो हमें हिंदुस्तान की सभी भाषाओं का न केवल संरक्षण, बल्कि संवर्धन भी करना पड़ेगा। हमारी अकादमी पिछले अनेक वर्षों से,अपने सीमित संसाधनों के बावजूद, यह कार्य लगातार कर रही है।
इस अवसर पर कई अन्य पुस्तकों का लोकार्पण व एक कवि-गोष्ठी का भी आयोजन किया गया,जिसमें दिल्ली,छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों से पधारे,अनेक कवि-कवयित्रियों ने कविता पाठ किया,जिनमें शामिल थे-युक्ता राशि, विनोद पाराशर,डॉ संजीव कुमार,डॉ वनिता शर्मा,डॉ कविता कपूर,राजकुमार श्रेष्ठ, विजय कुमार,साकेत चतुर्वेदी, नीरज,गोपाल सिंह, अनुराधा द्विवेदी, नैना देवी,संध्या श्रीवास्तव आदि।
इस अवसर के कुछ चित्र,यहॉं साझा किये जा रहे हैं।
भारत की राजधानी हॆ-यह दिल्ली.भारत का लघु-रुप हॆ यह दिल्ली.अनेकताओं में एकता का शहर हॆ-दिल्ली . दिलवालों का शहर हॆ यह दिल्ली.पाश्चात्य व पश्चिमी संस्कृति का मिश्रण हॆ-यह दिल्ली.भारतीय राजनीति का अखाडा हॆ यह दिल्ली.न जाने कितनी बार उजडी व बसी यह दिल्ली.इस दिल्ली शहर के साहित्यकारों,पत्रकारों व ब्लागरों का एक सामूहिक मंच हॆ-यह ’दिल्ली ब्लागर्स एसोशिएशन.
सोमवार, जून 20, 2022
प्रेम जनमेजय को पंडित माधव राव स्प्रे छत्तीसगढ़ मित्र साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान!
मंगलवार, अक्टूबर 19, 2021
'कल्लू मामा'का 'आगमन'की ओर से सम्मानU
गत रविवार, दिनाँक 17-10-2021 को,रोहिणी:दिल्ली के'हिंदुस्तानी भाषा अकादमी' सभागार में,साहित्यिक संस्था'आगमन'की ओर से वरिष्ठ व चर्चित व्यंग्यकार श्री सुभाष चंदर उर्फ 'कल्लू मामा'को विशिष्ट सम्मान दिया गया।सुभाष चंदर की अभी तक,व्यंग्य साहित्य की 47 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।'कल्लू मामा जिंदाबाद' भी उनके चर्चित व्यंग्यात्मक लेखों का संग्रह है।उनकी प्रसिद्धि का आलम यह है कि, अब लोग उन्हें'कल्लू मामा'के नाम से बुलाने लगे हैं।उन्हें संस्था की 'काव्य-संगोष्ठी'में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के संस्थापक-सुधाकर पाठक ने की।विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार श्री सुमोद सिंह चरौरा,श्रीमती सूक्ष्मलता महाजन,श्री अशोक गुप्ता, डॉ महेंद्र शर्मा'मधुकर' व डॉ नीलम वर्मा मौजूद थे।
कॅरोना-काल के उपरांत, आगमन की इस काव्य-संगोष्ठी में,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा उसके आस-पास के राज्यों से पधारे 30 से भी अधिक कवि व कवयित्रियों ने अपनी श्रृंगार,राष्ट्र-प्रेम व हास्य-व्यंग्य से ओत प्रोत कवितायें पढ़ी।कविता पाठ करने वालों में शामिल थे-स्वीट एंजेल, मनीषा जोशी,इंदु निगम, राजेन्द्र निगम,तरुणा पुंडीर, इंदु मिश्रा, मीनाक्षी भसीन,डॉ महेंद्र शर्मा मधुकर, सीमा अग्रवाल, सरोज शर्मा,डॉ पूजा कौशिक,कंचन पाठक,पंकज सिंह चावला,कंचन गुप्ता,बी.के.शोभा,अजय अक्स,,कमर बदरपुरी,भास्कर आनंद, दीपा गुप्ता, अमित गुप्ता, राजेन्द्र महाजन,स्वदेश सिंह चिरोरा, शिव नारायण,अवधेश कनोजिया, आकांक्षा, भारती विभूति ओमप्रकाश कल्याणे, सुंदर सिंह,सीमा सागर,विनोद पाराशर व कई अन्य कवि व कवयित्रियाँ।
मुख्य अतिथि श्री सुभाष चंदर को वैसे तो हम एक व्यंग्यकार के रूप में ही जानते हैं, लेकिन इस काव्य-संगोष्ठी में संवेदनशील कवि के रूप में भी उन्हें देखने का मौका मिला।
अपनी'बूढे लोग!' कविता में वरिष्ठ जनों के एकाकीपन की पीड़ा को,उन्होंने जिस मार्मिकता से व्यक्त किया , उसे सहज ही समझा जा सकता है।उनकी कविता की पंक्तियाँ थी-
बूढ़े लोग!
आत्महत्या तो कर सकते हैं
लेकिन-प्रेम नहीं कर सकते!
'प्रेम'उनके लिए
एक अश्लील कृत्य है!
कविता पाठ के अलावा, इस अवसर पर डॉ महिंदर मधुकर, इंदू मिश्रा किरण, डॉ पूजा कौशिक की पुस्तकों व सूक्ष्मलता महाजन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर केन्दित पत्रिका'ट्रू मीडिया'के विशेषांक का भी लोकार्पण किया गया।
लगभग 3-4 घन्टे तक चले,इस कार्यक्रम का कुशल संचालन कंचन पाठक ने किया।'आगामन' के संस्थापक श्री पवन जैन पिछले कई वर्षों से, वरिष्ठ कवियों व नवांकुरों को इस संस्था के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं,जो एक पुनीत कार्य है।धन कमाने की अंधी दौड़ में, जहाँ कुछ भी निःशुल्क मिल पाना लगभग असंभव है,वहीं पर सुधाकर पाठक जैसे साहित्य-प्रेमी व जुनूनी लोग, साहित्यिक कार्यक्रमों के लिए,'हिंदुस्तानी भाषा अकादमी' की ओर से निःशुल्क स्थान उपलब्ध करवा रहे हैं।सभी साहित्यकारों की ओर से ऐसी महान विभूतियों को नमन है।
शनिवार, अगस्त 15, 2020
स्वतंत्रता दिवस पर'साधना टी.वी.पर कविता पाठ
कल शाम 6.00 बजे,'साधना टी.वी' पर'सतमोला कवियों की चौपाल' के 611वें एपिसोड का प्रसारण किया गया।इस एपिसोड में मुझे भी अपनी कविताएँ सुनाने का अवसर मिला।श्रीमती मृदुला सिन्हा( वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व राज्यपाल गोवा) इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।मेरे अलावा,जिन अन्य कवियों ने अपनी अपनी कविताएं पढ़ी,उनमें शामिल थे-डॉ कीर्ति काले(अंतरराष्ट्रीय कवयित्री),सोनम आर्य(विलासपुर),यश जैन(दिल्ली),अनुराग प्रबल पटेल(गाज़ियाबाद), सुरेश कुमार जैन(हैदराबाद),आशु शर्मा(मुंबई),कृष्णा भीवानीवाला(कलकत्ता) और संजू सूर्यम ठाकुर(मैनपुरी)।कार्यक्रम का आयोजन, स्वतंत्रता दिवस की 74 वीं व 'सतमोला कवियों की चौपाल' की 16वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में किया गया था। 'सतमोला कवियों की चौपाल' कविताओं का एक मात्र कार्यक्रम है,जो पिछले 16 वर्ष से लगातार चल रहा है,इसके लिए कार्यक्रम के प्रोड्यूसर, प्रवीण आर्य बधाई के पात्र हैं।कार्यक्रम का संचालन-रजनी अवनी ने किया।
रविवार, अगस्त 06, 2017
6 अगस्त,2017 को,नई दिल्ली,कनाट प्लेस के 'ऑक्सफ़ोर्ड बुक सेंटर में 'लेखन व प्रकाशन कार्यशाला का आयोजन' माय बुक पब्लिकेशन' की ओर से किया गया|इस कार्यशाला को,मुख्य वक्ता के रूप में अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार श्री लक्षमण राव जी ने संबोधित किया| यहाँ उल्लेखनीय है कि श्री राव ने आर्थिक रूप से संपन्न न होते हुए भी ,अपने अथक परिश्रम,लगन व दृढ़ निश्चय के बल पर,अभी तक 25 पुस्तकों का लेखन व प्रकाशन किया है|श्री राव का कहना है कि सिर्फ साहित्यिक लेखन के सहारे, घर नहीं चलाया जा सकता ,इसलिए आज भी दिल्ली के 'हिंदी -भवन' के पास,पटरी पर वे अपनी छोटी सी चाय की दुकान चला रहे हैं|
नये लेखकों के लिए उनका सन्देश है कि लेखन कर्म इतना सहज नहीं है,इसके लिए दृढ़ इच्छा-शक्ति,लगातार प्रयास व अध्ययन की आवश्यकता है|नयी पीढ़ी में धैर्य की कमी है,उसे सब कुछ फटाफट चाहिये| साहित्यिक लेखन में तुरंत कुछ नहीं मिलता| इसके अलावा राव जी ने लेखन के क्षेत्र से जुड़े,जीवन के अन्य खट्टे-मीठे अनुभवों को भी साझा किया | नये लेखकों ने,लेखन व प्रकाशन से सबंधित अनेक सवाल भी किये,जिनका उन्होन्हें बड़ी सहजता से जवाब दिया|
इस अवसर पर श्री सुप्रीत अरोड़ा जी ने ब्लॉग-लेखन से सबंधित जानकारी भी उपस्थित लेखक समुदाय को दी|
इस अवसर के कुछ अन्य झलकियां|

















