शिकारी सिंह युवा एवं महत्वकांक्षी पत्रकार था। जल्द से जल्द पैसा व शोहरत पाने की खातिर उसने स्टिंग ऑपरेशन का सहारा लेने का निश्चय किया और उसके स्टिंग ऑपरेशन के शिकार हो गये 2 प्रतिशत ईमानदार व 98 प्रतिशत बेइमान मंत्री फटीचर लाल। जब फटीचर लाल को इस बात का पता चला तो उन्होंने शिकारी सिंह को अपनी 2 प्रतिशत ईमानदारी का वास्ता दिया...आगे पढ़ें...
भारत की राजधानी हॆ-यह दिल्ली.भारत का लघु-रुप हॆ यह दिल्ली.अनेकताओं में एकता का शहर हॆ-दिल्ली . दिलवालों का शहर हॆ यह दिल्ली.पाश्चात्य व पश्चिमी संस्कृति का मिश्रण हॆ-यह दिल्ली.भारतीय राजनीति का अखाडा हॆ यह दिल्ली.न जाने कितनी बार उजडी व बसी यह दिल्ली.इस दिल्ली शहर के साहित्यकारों,पत्रकारों व ब्लागरों का एक सामूहिक मंच हॆ-यह ’दिल्ली ब्लागर्स एसोशिएशन.
बुधवार, नवंबर 16, 2011
स्टिंग ऑपरेशन (लघु कथा)
शिकारी सिंह युवा एवं महत्वकांक्षी पत्रकार था। जल्द से जल्द पैसा व शोहरत पाने की खातिर उसने स्टिंग ऑपरेशन का सहारा लेने का निश्चय किया और उसके स्टिंग ऑपरेशन के शिकार हो गये 2 प्रतिशत ईमानदार व 98 प्रतिशत बेइमान मंत्री फटीचर लाल। जब फटीचर लाल को इस बात का पता चला तो उन्होंने शिकारी सिंह को अपनी 2 प्रतिशत ईमानदारी का वास्ता दिया...आगे पढ़ें...
मंगलवार, नवंबर 01, 2011
गर्व (लघु कथा )
मंगलवार, अक्टूबर 04, 2011
एक पत्र लंकाधीश रावण के नाम
सादर दहनस्ते!
बहुत दिनों से मेरे भोले से मन में एक प्रश्न खलबली मचाये हुए है. यही कि आपके सिर तो पूरे दस हैं और हाथ केवल दो. जब कभी मौसम बदलता होगा और आपको जुकाम होता होगा तो कैसे व्यवस्थित करते होंगे अपने दो हाथों से दस नाकों को. रावण जी इश्माइल...आगे पढ़ें...
बुधवार, सितंबर 21, 2011
एक पत्र शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नाम

प्यारे शहीद मोहन चंद शर्मा
सादर कुर्बानस्ते !
सर्वप्रथम आपकी देश के प्रति असीम त्याग जी भावना को नमन करता हूँ जिसको धारण कर आपने आतंकियों से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. देश भक्तों के लिए परसों आपकी शहादत का दिन था और देशद्रोहियों के लिए बटला हाउस एनकाउन्टर की बरसी. बटला हाउस क्षेत्र में देशद्रोही कई दिनों से बटला हाउस एनकाउन्टर के विरोध में रैलियां निकाल रहे थे और आतंकियों की जन्मभूमि आजमगढ़ व उसके आस-पास के क्षेत्र से मार्च करके जंतर-मंतर पर इकट्ठे हो रहे थे. वहीं कुछ देशप्रेमी जुलैना चौक पर... आगे पढ़ें...
सोमवार, सितंबर 05, 2011
हाथी के दांत (लघु कथा)
मंगलवार, अगस्त 30, 2011
एक पत्र अन्ना के नाम
प्यारे अन्ना हजारे जी
सादर अनशनस्ते
सोमवार, अगस्त 22, 2011
बी.पी.एल एकाउन्टस यानी गरीबों के खाते

पत्नी ने-
पहली बार
हमें-शक की निगाह से देखा.
हमने पूछा-
क्या हुआ?
माई डीयर सुरेखा.
वो बोली-
देख रही हूं
पिछले कुछ दिनों से-
बदले-बदले नजर आ रहे हो
न तो ढंग से खा-पी रहे हो
ऒर न ही-
हमसे बतिया रहे हो
बात-बात पर-
झल्ला रहे हो.
सुबह-सुबह-
घर से-जल्दी निकल जाते हो
रात को भी-
देर से ही वापस आते हो
जरा मॆं भी तो सुनूं-
आजकल-
किस कलमुंही के पास जाते हो.
हमने-पत्नी को समझाया-
हे मेरी प्राण-प्रिय सुरेखा!
क्यों खींचती हो?
संबंधों के बीच-
यह ’शक’की लक्ष्मण-रेखा.
तू मान या मत मान
डाक-विभाग ने चलाया हॆ
घर-घर जाकर-
गरीबों के खाते खोलने का
विशेष अभियान.
सुबह-शाम-
उसी अभियान पर जा रहा हूं
तू कुछ ऒर न समझ-
में तो घर-घर जाकर-
सिर्फ उनके खाते खुलवा रहा हूं
यानी-अपनी ड्यूटी निभा रहा हूं.
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