बुधवार, नवंबर 16, 2011

स्टिंग ऑपरेशन (लघु कथा)


शिकारी सिंह युवा एवं महत्वकांक्षी पत्रकार था। जल्द से जल्द पैसा व शोहरत पाने की खातिर उसने स्टिंग ऑपरेशन का सहारा लेने का निश्चय किया और उसके स्टिंग ऑपरेशन के शिकार हो गये 2 प्रतिशत ईमानदार व 98 प्रतिशत बेइमान मंत्री फटीचर लाल। जब फटीचर लाल को इस बात का पता चला तो उन्होंने शिकारी सिंह को अपनी 2 प्रतिशत ईमानदारी का वास्ता दिया...आगे पढ़ें...

मंगलवार, नवंबर 01, 2011

गर्व (लघु कथा )

"माँ आज तुमने इतनी मार्मिक कविता सुनाई कि श्रोताओं की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. आज तुमने मेरा जन्मदिन का कार्यक्रम सफल कर दिया." आनन्द अपनी माँ को कार से उतारते हुए बोला. आनन्द की माँ प्यार से उसके सिर पर हाथ फिराते हुए बोलीं, "मेरा बेटा देश का इतना बड़ा कवि है... आगे पढ़ें

मंगलवार, अक्टूबर 04, 2011

एक पत्र लंकाधीश रावण के नाम

प्यारे लंकाधीश रावण

सादर दहनस्ते!

बहुत दिनों से मेरे भोले से मन में एक प्रश्न खलबली मचाये हुए है. यही कि आपके सिर तो पूरे दस हैं और हाथ केवल दो. जब कभी मौसम बदलता होगा और आपको जुकाम होता होगा तो कैसे व्यवस्थित करते होंगे अपने दो हाथों से दस नाकों को. रावण जी इश्माइल...आगे पढ़ें...

बुधवार, सितंबर 21, 2011

एक पत्र शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नाम


प्यारे शहीद मोहन चंद शर्मा
सादर कुर्बानस्ते !
सर्वप्रथम आपकी देश के प्रति असीम त्याग जी भावना को नमन करता हूँ जिसको धारण कर आपने आतंकियों से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. देश भक्तों के लिए परसों आपकी शहादत का दिन था और देशद्रोहियों के लिए बटला हाउस एनकाउन्टर की बरसी. बटला हाउस क्षेत्र में देशद्रोही कई दिनों से बटला हाउस एनकाउन्टर के विरोध में रैलियां निकाल रहे थे और आतंकियों की जन्मभूमि आजमगढ़ व उसके आस-पास के क्षेत्र से मार्च करके जंतर-मंतर पर इकट्ठे हो रहे थे. वहीं कुछ देशप्रेमी जुलैना चौक पर... आगे पढ़ें...

सोमवार, सितंबर 05, 2011

हाथी के दांत (लघु कथा)

"आइये शर्मा जी. अहो भाग्य हमारे जो आप हमारे स्कूल में पधारे" भीमसेन बड़ी विनम्रता से शर्मा जी का स्वागत करते हुए बोले. शर्मा जी कुर्सी पर बैठते हुए बोले, "अरे भीमसेन जी ये तो हमारा सौभाग्य है जो हमें आपके विद्यालय में आने का अवसर मिला. आपके सम्मुख एक निवेदन लेकर आये हैं." भीमसेन ने कहा, "अरे शर्मा जी क्यों शर्मिंदा कर रहे हैं...आगे पढ़ें

मंगलवार, अगस्त 30, 2011

एक पत्र अन्ना के नाम



प्यारे अन्ना हजारे जी

सादर अनशनस्ते

आपको हृदय से नमन करते हुए पत्र प्रारंभ करता हूँ. जब भारत देश घोटालों से त्रस्त हुआ, जब आम भारतीय मंहगाई से पस्त हुआ और जब भ्रष्टाचार की बांसुरी बजाकर शासन तंत्र मदमस्त हुआ तब आप संकटमोचक बनकर आये और बस गए हर भारतीय के दिल में. आपका भोला-भाला व्यक्तित्व भारतीय मानुष के मन में एक नई आशा जगाता है. हम भारतीय विश्व की नज़रों में तो सन1947 में हीआज़ाद हो गए थे किन्तु अंग्रेज जाते-2 अपनी कार्बन कॉपियां अर्थात काले अंग्रेज यहीं छोड़ कर चले गए जो धूर्तता में अपनी ऑरिजिनल कापियों से भी एक कदम बढ़कर निकले. आगे पढ़ें...

सोमवार, अगस्त 22, 2011

बी.पी.एल एकाउन्टस यानी गरीबों के खाते

आजकल, भारतीय डाक विभाग के दिल्ली सर्कल में -BPL ACCOUNTS यानी गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के खाते खोलने का अभियान विभाग ने चला रखा हॆ.प्रत्येक प्रखण्ड को इस संबंध में लक्ष्य आबंटित कर दिये गये हॆं.टीमें गठित की जा चुकी हॆं-जो घर-घर जाकर लोगों के खाते खोल रहीं हॆं.टीम सदस्यों को सख्त हिदायत दी गयी हॆ कि-वे सुबह -शाम-बी.पी.एल.कार्डधारकों से जाकर,उनकी सुविधा के अनुसार मिलें-ऒर खाते खोलकर -इस वित्तिय-वर्ष की समाप्ति तक-निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करें.टीम सदस्यों पर अधिक से अधिक संख्या में खाता खोलने का दवाब हॆ.इस दवाब के कारण-कुछ सदस्य अपने घर-परिवार के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दे पा रहे हॆं. उनकी इसी व्यथा को हास्य-व्यंग्य शॆली में अभिव्यक्ति देती पढिये यह कविता:-




पत्नी ने-
पहली बार
हमें-शक की निगाह से देखा.
हमने पूछा-
क्या हुआ?
माई डीयर सुरेखा.
वो बोली-
देख रही हूं
पिछले कुछ दिनों से-
बदले-बदले नजर आ रहे हो
न तो ढंग से खा-पी रहे हो
ऒर न ही-
हमसे बतिया रहे हो
बात-बात पर-
झल्ला रहे हो.
सुबह-सुबह-
घर से-जल्दी निकल जाते हो
रात को भी-
देर से ही वापस आते हो
जरा मॆं भी तो सुनूं-
आजकल-
किस कलमुंही के पास जाते हो.
हमने-पत्नी को समझाया-
हे मेरी प्राण-प्रिय सुरेखा!
क्यों खींचती हो?
संबंधों के बीच-
यह ’शक’की लक्ष्मण-रेखा.
तू मान या मत मान
डाक-विभाग ने चलाया हॆ
घर-घर जाकर-
गरीबों के खाते खोलने का
विशेष अभियान.
सुबह-शाम-
उसी अभियान पर जा रहा हूं
तू कुछ ऒर न समझ-
में तो घर-घर जाकर-
सिर्फ उनके खाते खुलवा रहा हूं
यानी-अपनी ड्यूटी निभा रहा हूं.
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