बुधवार, जून 15, 2011

एक पत्र भारतीय किसान के नाम

प्यारे भारतीय किसान
सादर क़र्ज़स्ते!

कल तुम्हारा किसान साथी छज्जू राम पेड़ पर फ़ासी लगा कर क्या मरा पूरे सूबे में ही मानो फ़ासी झूलने की बीमारी छूत की भांति फ़ैल गई. प्रशासन भी सकते में आ गया और आला अधिकारियों में भी हडकंप सा मच गया तो मन किया कि एक पत्र लिखकर तुम्हारे दुखों पर मरहम लगाने का कुछ प्रयास कर लूं. हम सभी का दिल बहुत दुखता है जब तुम्हारे किसान बंधु एक झटके में ही अपनी जान दे देते हैं. अब तुम जो अपनी दुःख भरी कहानी सुनाओगे उसे मै...आगे पढ़ें...

गुरुवार, जून 09, 2011

एक पत्र जाति प्रथा के नाम

आदरणीय जाति प्रथा

सादर बाँटस्ते

आज की परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए आपको यह पत्र लिख रहा हूँ. ऋग्वेद के दसवें मंडल के पुरुष सूक्त में विराट द्वारा आपकी उत्पति की गयी थी. जिसमें कहा गया था की ब्राम्हण परम-पुरुष के मुख से, क्षत्रिय उनकी भुजाओं से, वैश्य उनकी जंघाओं से तथा शूद्र उनके पैरों उत्पन्न हुए थे तथा इन सभी के कार्य भी क्रमश शिक्षा देना, युद्ध करना, खेती करना तथा चौथे वर्ण का कार्य तीनों वर्णों की सेवा करना था. सही मायने में देखा जाए तो आर्यों ने ऋग्वेदिक काल में सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्यों का वैज्ञानिक आधार पर...आगे पढ़ें

शनिवार, मई 28, 2011

टाटा (लघु कथा)

मासूम ने देखा कि बस में बहुत देर से एक महिला अपने बच्चे को गोद में लिए खड़ी थी तथा कठिनाई अनुभव कर रही थी .उसने दया कर उसे अपनी सीट दे दी. अगले स्टैंड पर दूसरी सीट भी खाली हो गई व मासूम उस महिला के बगल में ही बैठ गया. महिला मासूम द्वारा सीट देने के लिए उसके प्रति आभारी थी. बातों का सिलसिला शुरू हो गया. उस महिला के नैन -नक्श आकर्षित करने वाले थे. मासूम उसके रूप के आकर्षण में आगे पढ़ें..

शुक्रवार, मई 20, 2011

अपहरण (लघु कथा)

कमरे का दरवाजा खोलकर राजू अंदर आया और हँसते हुए बोला, "असलम तेरे भईया आ गये हैं तुझे छुडवाने के लिए. बेचारे तुझे सही-सलामत वापस लौटाने के लिए बहुत गिड़गिड़ा रहे थे. पहली बार किसी पुलिसवाले को ऐसी हालत में देखा है. जितना रुपया माँगा था, ले आये .पूरे पांच लाख हैं." असलम ने राजू व वहां मौजूद एक और लड़के सचिन के हाथों में ताली मारी और आगे पढ़ें..

बुधवार, मई 18, 2011

मेरी बहना चली गई

वो मुझसे अक्सर कहती थी कि जब मैं जाऊंगी तो तेरे सीने से लग कर खूब रोऊँगी और मैं भी हंसकर उससे कहता था कि वह किसी गलतफहमी में न रहे क्योंकि मैं उसके जाने पर बिलकुल नहीं रोने वाला. आज जब वह विदा होकर जाने लगी तो आगे पढ़ें...

रविवार, मई 15, 2011

अपने और पराये (लघु कथा)

"ठीक है भैया समझो आपका ये काम हो गया." इतना कहकर अनिरुद्ध ने फोन रख दिया व कुर्सी पर आराम की स्थिति में बैठे-२ सोचने, अभी दिन ही कितने हुए भैया से मिले कोई दो साल बस किन्तु इन दो सालों में भैया से नाता सगे भाई से बढ़कर हो गया. कभी-२ भैया खुद ही हंसकर कहने लगते हैं, " हम दोनों का रिश्ता पिछले जन्म का है. हो न हो तुम पिछले जन्म में छोटे भाई होगे और बेशक इस जन्म में तुम मेरे सगे भाई नहीं हो लेकिन तुम मेरे लिए लक्ष्मण के जैसे हो." भाभी भी अक्सर बताती हैं, "ये तुम्हें अपने सगे भाई से भी अधिक चाहते हैं।" तभी चाय वाला चाय लेकर आता है. चाय की चुस्कियां लेते हुए आगे पढ़ें...

रविवार, मई 08, 2011

एक लड़की मुझको भाती है

कॉलेज़ में एक लड़का था
सबने ही उसको हड़का था
कविता एक ही कहता था
उसको ही कहता रहता था
एक लड़की मुझको भाती है

एक लड़की मुझको भाती है...


जब भी मौका मिलता तो
झट से आगे बढता था आगे पढ़ें..