भारत की राजधानी हॆ-यह दिल्ली.भारत का लघु-रुप हॆ यह दिल्ली.अनेकताओं में एकता का शहर हॆ-दिल्ली . दिलवालों का शहर हॆ यह दिल्ली.पाश्चात्य व पश्चिमी संस्कृति का मिश्रण हॆ-यह दिल्ली.भारतीय राजनीति का अखाडा हॆ यह दिल्ली.न जाने कितनी बार उजडी व बसी यह दिल्ली.इस दिल्ली शहर के साहित्यकारों,पत्रकारों व ब्लागरों का एक सामूहिक मंच हॆ-यह ’दिल्ली ब्लागर्स एसोशिएशन.
शनिवार, मई 28, 2011
टाटा (लघु कथा)
मासूम ने देखा कि बस में बहुत देर से एक महिला अपने बच्चे को गोद में लिए खड़ी थी तथा कठिनाई अनुभव कर रही थी .उसने दया कर उसे अपनी सीट दे दी. अगले स्टैंड पर दूसरी सीट भी खाली हो गई व मासूम उस महिला के बगल में ही बैठ गया. महिला मासूम द्वारा सीट देने के लिए उसके प्रति आभारी थी. बातों का सिलसिला शुरू हो गया. उस महिला के नैन -नक्श आकर्षित करने वाले थे. मासूम उसके रूप के आकर्षण में आगे पढ़ें..
शुक्रवार, मई 20, 2011
अपहरण (लघु कथा)
कमरे का दरवाजा खोलकर राजू अंदर आया और हँसते हुए बोला, "असलम तेरे भईया आ गये हैं तुझे छुडवाने के लिए. बेचारे तुझे सही-सलामत वापस लौटाने के लिए बहुत गिड़गिड़ा रहे थे. पहली बार किसी पुलिसवाले को ऐसी हालत में देखा है. जितना रुपया माँगा था, ले आये .पूरे पांच लाख हैं." असलम ने राजू व वहां मौजूद एक और लड़के सचिन के हाथों में ताली मारी और आगे पढ़ें..
बुधवार, मई 18, 2011
मेरी बहना चली गई
रविवार, मई 15, 2011
अपने और पराये (लघु कथा)
रविवार, मई 08, 2011
एक लड़की मुझको भाती है
कॉलेज़ में एक लड़का था
सबने ही उसको हड़का था
कविता एक ही कहता था
उसको ही कहता रहता था
एक लड़की मुझको भाती है
एक लड़की मुझको भाती है...
जब भी मौका मिलता तो
झट से आगे बढता था आगे पढ़ें..
गुरुवार, मई 05, 2011
किसी से कहना नहीं (लघु कथा)
माँ उदास हो आँगन में बैठी थी की तभी पड़ोस की आंटी आ धमकी. माँ को उदास बैठे देख उन्होंने पूछ लिया, "क्या बात हैं आज इतनी उदास क्यों हो".माँ ने बात टालते हुए कहा ,"कुछ ख़ास नहीं आज यूं ही थोडा मूड ठीक नहीं है ".आंटी जी माँ के पास बैठी और बोली ,"तुम कभी भी यूं ही उदास नहीं होती कुछ न कुछ बात तो है. मुझे नही बताओगी.” आगे पढ़ें...
शुक्रवार, अप्रैल 29, 2011
अमीर-गरीब (लघु कथा)
शिष्य को चुपचाप बैठे देख गुरु ने उससे पूछा
गुरु : पुत्र कहाँ खोये हुए हो ?
शिष्य : गुरुदेव सामने खड़े रेहड़ीवाले को देख मन में कुछ विचार उमड़ रहे हैं.
गुरु : कैसे विचार पुत्र ?
शिष्य : यही कि रेहड़ीवाला गरीब है और अपना गुजारा परांठे की रेहड़ी लगाकर चलाता है.
शिष्य : गुरु देव रेहड़ीवाला गरीब है फिर भी आगे पढ़ें...
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