भारत की राजधानी हॆ-यह दिल्ली.भारत का लघु-रुप हॆ यह दिल्ली.अनेकताओं में एकता का शहर हॆ-दिल्ली . दिलवालों का शहर हॆ यह दिल्ली.पाश्चात्य व पश्चिमी संस्कृति का मिश्रण हॆ-यह दिल्ली.भारतीय राजनीति का अखाडा हॆ यह दिल्ली.न जाने कितनी बार उजडी व बसी यह दिल्ली.इस दिल्ली शहर के साहित्यकारों,पत्रकारों व ब्लागरों का एक सामूहिक मंच हॆ-यह ’दिल्ली ब्लागर्स एसोशिएशन.
शुक्रवार, मई 20, 2011
अपहरण (लघु कथा)
बुधवार, मई 18, 2011
मेरी बहना चली गई
रविवार, मई 15, 2011
अपने और पराये (लघु कथा)
रविवार, मई 08, 2011
एक लड़की मुझको भाती है
कॉलेज़ में एक लड़का था
सबने ही उसको हड़का था
कविता एक ही कहता था
उसको ही कहता रहता था
एक लड़की मुझको भाती है
एक लड़की मुझको भाती है...
जब भी मौका मिलता तो
झट से आगे बढता था आगे पढ़ें..
गुरुवार, मई 05, 2011
किसी से कहना नहीं (लघु कथा)
शुक्रवार, अप्रैल 29, 2011
अमीर-गरीब (लघु कथा)
शिष्य को चुपचाप बैठे देख गुरु ने उससे पूछा
गुरु : पुत्र कहाँ खोये हुए हो ?
शिष्य : गुरुदेव सामने खड़े रेहड़ीवाले को देख मन में कुछ विचार उमड़ रहे हैं.
गुरु : कैसे विचार पुत्र ?
शिष्य : यही कि रेहड़ीवाला गरीब है और अपना गुजारा परांठे की रेहड़ी लगाकर चलाता है.
शिष्य : गुरु देव रेहड़ीवाला गरीब है फिर भी आगे पढ़ें...
रविवार, अप्रैल 24, 2011
एक पत्र पोस्टमैन चचा के नाम
प्यारे पोस्टमैन चचा
सादर डाकस्ते!
इतने दिन बीत गये किन्तु न तो आप आये न ही कोई पत्र . वो भी क्या दिन थे जब आपसे नियमित भेंट होती रहती थी. खाकी वस्त्र धारण किये हुए साइकल पर सवार हो पत्रों का झोला टाँगे आप अचानक ही प्रकट हो जाते थे और दे जाते थे खट्टी-मीठी खबरों से भरा एक पत्र. आप मात्र सादा पत्र ही नहीं बल्कि साक्षात्कार पत्र व नौकरी के नियुक्ति पत्र के रूप में हमारा भाग्य भी संग ले आते थे और कभी-२ मनी ऑर्डर द्वारा हमारी जेब भी भर जाते थे. हम सब आपकी उत्सुकता से प्रतीक्षा में आगे पढ़ें...