
मंगलवार, जुलाई 26, 2011
बुधवार, जुलाई 20, 2011
अजमल कसाब का जिहादियों के नाम एक पत्र
प्यारे जिहादी भाइयो
सादर विस्फोटस्ते
यहाँ मैं खैरियत से हूँ. आप सब कैसे हैं. अब्बा तालिबान और अलकायदा अम्मी के क्या हाल हैं. गोलीबारी और बम फोड़ने का अभ्यास कैसा चल रहा हैं. जिहाद के नाम पर आज कल रोज कितने काफ़िर हलाल किये जा रहे है. यहाँ जेल में तो ऐसा मुबारक काम करने का मौका ही नहीं मिल पाता है.
अपने हाथों से छुरे से जिन्दा इंसान की गर्दन धीमे -२ कतरने का मजा ही...आगे पढ़ें
सादर विस्फोटस्ते
यहाँ मैं खैरियत से हूँ. आप सब कैसे हैं. अब्बा तालिबान और अलकायदा अम्मी के क्या हाल हैं. गोलीबारी और बम फोड़ने का अभ्यास कैसा चल रहा हैं. जिहाद के नाम पर आज कल रोज कितने काफ़िर हलाल किये जा रहे है. यहाँ जेल में तो ऐसा मुबारक काम करने का मौका ही नहीं मिल पाता है.
अपने हाथों से छुरे से जिन्दा इंसान की गर्दन धीमे -२ कतरने का मजा ही...आगे पढ़ें
मंगलवार, जुलाई 05, 2011
एक पत्र भ्रष्टाचार बाबा के नाम
प्यारे भ्रष्टाचार बाबा
सादर घूसस्ते!
आपके लिए एक दुःख भरा समाचार हैं. यही कि आपके विरुद्ध अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में आपके शत्रुओं ने युद्ध का शंखनाद कर दिया हैं. आपको यह सब जानकर दुःख तो बहुत हो रहा होगा क्योंकि सदियों से आपने इस देश में डेरा डाल रखा है . सभी उम्र बढ़ने के साथ -२ वृद्ध व निर्बल होते हैं किन्तु आप तो समय बीतने के साथ -२ और अधिक युवा व सशक्त होते जा रहे हैं...आगे पढ़ें...
सादर घूसस्ते!
आपके लिए एक दुःख भरा समाचार हैं. यही कि आपके विरुद्ध अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में आपके शत्रुओं ने युद्ध का शंखनाद कर दिया हैं. आपको यह सब जानकर दुःख तो बहुत हो रहा होगा क्योंकि सदियों से आपने इस देश में डेरा डाल रखा है . सभी उम्र बढ़ने के साथ -२ वृद्ध व निर्बल होते हैं किन्तु आप तो समय बीतने के साथ -२ और अधिक युवा व सशक्त होते जा रहे हैं...आगे पढ़ें...
रविवार, जुलाई 03, 2011
अपने और पराये(लघु कथा)
"ठीक है भैया समझो कि आपका ये काम हो गया." इतना कहकर अनिरुद्ध ने फोन रख दिया व कुर्सी पर आराम की स्थिति में बैठे-२ सोचने लगा, “अभी दिन ही कितने हुए भैया से मिले कोई दो साल बस किन्तु इन दो सालों में भैया से नाता सगे भाई से बढ़कर हो गया.” कभी-२ भैया खुद ही हंसकर कहने लगते हैं, " हम दोनों का रिश्ता पिछले जन्म का है. हो न हो तुम पिछले जन्म में मेरे छोटे भाई होगे और बेशक इस जन्म में तुम मेरे सगे भाई नहीं हो लेकिन तुम मेरे लिए लक्ष्मण के जैसे हो." भाभी भी अक्सर बताती हैं...आगे पढ़ें...
सोमवार, जून 27, 2011
एक पत्र कबाड़ी चाचू के नाम
प्यारे कबाड़ी चाचू
सादर धूर्तस्ते
तुमने हम सब के लिए इतना कुछ किया है की उन कार्यों का सम्मान करते हुए तुम्हें यह पत्र लिख रहे हैं. हमें याद है कि जब हम बचपन और जवानी के पलों को जी रहे थे तब तुम हमारे जीवन में पधारे थे. जब घर का छोटा-मोटा कबाड़ा तुम्हें बेचने के लिए हम आते थे तो तुम अपनी मधुर मुस्कान, जो वास्तव में बहुत कुटिल थी, से हमारा स्वागत करते थे..आगे पढ़ें
सादर धूर्तस्ते
तुमने हम सब के लिए इतना कुछ किया है की उन कार्यों का सम्मान करते हुए तुम्हें यह पत्र लिख रहे हैं. हमें याद है कि जब हम बचपन और जवानी के पलों को जी रहे थे तब तुम हमारे जीवन में पधारे थे. जब घर का छोटा-मोटा कबाड़ा तुम्हें बेचने के लिए हम आते थे तो तुम अपनी मधुर मुस्कान, जो वास्तव में बहुत कुटिल थी, से हमारा स्वागत करते थे..आगे पढ़ें
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