सोमवार, नवंबर 28, 2011

गश्त (लघु कथा)



एस.एच.ओ. (थानाध्यक्ष) रात के स्टाफ की ब्रीफिंग लेते हुए बोला, " तुम सब रात की गश्त ढंग से क्यों नहीं करते. आज डी.सी.पी. ने मुझे बुलाकर फिर से मेरी माँ-बहन एक कर डाली. अगर तुम्हें कामचोरी की गन्दी आदत पड़ ही गई है तो कम से कम पत्रकार अरोड़ा की गली में तो एक चक्कर लगा आया करो. साला हर दूसरे दिन अपने अखबार में खबर छाप देता है कि इलाके की पुलिस गश्त नहीं करती."

रात का स्टाफ एक सुर में बोला, "जनाब हम सब नियम से रात को थाने के इलाके के चप्पे-२ में गश्त करते हैं." एस.एच.ओ. ने उनसे खीज कर पूछा, "तो फिर अरोड़ा अपने अखबार में यह खबर क्यों छापता है कि तुम सब गश्त नहीं करते?" आगे पढ़ें...

मंगलवार, नवंबर 22, 2011

नूडल्स (लघु कथा)


गाड़ी में चलते-फिरते रेस्टोरेंट का मालिक बूढ़े कुक पर गुर्राया, "अबे बुड्ढे इतनी उम्र हो गयी है लेकिन तुझे नूडल्स बनाने नहीं आये. देख आज फिर से ग्राहक नूडल्स बिना खाए छोड़ गए. साले गलती तू करे और भुगतूं मैं." "लेकिन साब मैंने तो नूडल्स सही बनाए थे." बूढ़ा कुक धीमी आवाज में बोला. "चुप बे बुड्ढे! सही बनाए थे तो ग्राहक क्यों अंट-शंट बक रहे थे? आगे पढ़ें

रविवार, नवंबर 20, 2011

कुछ खास है मेरी दिल्ली में

ये शहर अजब सा है

ये शहर गजब सा है

कुछ बात तो है

इसमें ये शहर अलग सा है।

क्या फिजा है

क्या अदा है

ये शहर तो

सबसे जुदा है

कुछ न कुछ तो खास है...आगे पढ़ें


बुधवार, नवंबर 16, 2011

स्टिंग ऑपरेशन (लघु कथा)


शिकारी सिंह युवा एवं महत्वकांक्षी पत्रकार था। जल्द से जल्द पैसा व शोहरत पाने की खातिर उसने स्टिंग ऑपरेशन का सहारा लेने का निश्चय किया और उसके स्टिंग ऑपरेशन के शिकार हो गये 2 प्रतिशत ईमानदार व 98 प्रतिशत बेइमान मंत्री फटीचर लाल। जब फटीचर लाल को इस बात का पता चला तो उन्होंने शिकारी सिंह को अपनी 2 प्रतिशत ईमानदारी का वास्ता दिया...आगे पढ़ें...

मंगलवार, नवंबर 01, 2011

गर्व (लघु कथा )

"माँ आज तुमने इतनी मार्मिक कविता सुनाई कि श्रोताओं की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. आज तुमने मेरा जन्मदिन का कार्यक्रम सफल कर दिया." आनन्द अपनी माँ को कार से उतारते हुए बोला. आनन्द की माँ प्यार से उसके सिर पर हाथ फिराते हुए बोलीं, "मेरा बेटा देश का इतना बड़ा कवि है... आगे पढ़ें

मंगलवार, अक्टूबर 04, 2011

एक पत्र लंकाधीश रावण के नाम

प्यारे लंकाधीश रावण

सादर दहनस्ते!

बहुत दिनों से मेरे भोले से मन में एक प्रश्न खलबली मचाये हुए है. यही कि आपके सिर तो पूरे दस हैं और हाथ केवल दो. जब कभी मौसम बदलता होगा और आपको जुकाम होता होगा तो कैसे व्यवस्थित करते होंगे अपने दो हाथों से दस नाकों को. रावण जी इश्माइल...आगे पढ़ें...

बुधवार, सितंबर 21, 2011

एक पत्र शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नाम


प्यारे शहीद मोहन चंद शर्मा
सादर कुर्बानस्ते !
सर्वप्रथम आपकी देश के प्रति असीम त्याग जी भावना को नमन करता हूँ जिसको धारण कर आपने आतंकियों से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. देश भक्तों के लिए परसों आपकी शहादत का दिन था और देशद्रोहियों के लिए बटला हाउस एनकाउन्टर की बरसी. बटला हाउस क्षेत्र में देशद्रोही कई दिनों से बटला हाउस एनकाउन्टर के विरोध में रैलियां निकाल रहे थे और आतंकियों की जन्मभूमि आजमगढ़ व उसके आस-पास के क्षेत्र से मार्च करके जंतर-मंतर पर इकट्ठे हो रहे थे. वहीं कुछ देशप्रेमी जुलैना चौक पर... आगे पढ़ें...